ंत में जीत उसी की रहे आजा रे आजा रे आजा रे आजा रे भले कितने लंबे हों रस्ते हो थके ना तेरे ये तन्न हो आजा रे आजा रे सुन ले पुकारे डगरिया रहे ना ये रास्ते तरसते हो तू आजा रे इस धरती का है राजा तू ये बात जान ले तू कठिनाई से टकरा जा तू नहीं हार मान ले तू ओ मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे
पनी है
ंबर है रे ओ मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे
पनी है
ंबर है रे तू आजा रे सुन लो रे मितवा जो है तुमरे मन में वो ही हमरे मन में जो सपना है तुमरा सपना वो ही हमरा है जीवन में हाँ चले हम लिए आशा के दीये नयन में दिए हमरी आशाओं के कभी बुझ ना पाएँ कभी आँधियाँ जो आके इनको बुझाएँ ओ मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे
पनी है
ंबर है रे ओ मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे
पनी है
ंबर है रे तू आजा रे आजा रे आजा रे सुन लो रे मितवा पुरवा भी गाएगी मस्ती भी छाएगी मिलके पुकारो तो फूलों वाली जो रुत है आएगी हाँ सुख भरे दिन दुख के बिन लाएगी हम तुम सजाएँ आओ रंगों के मेले
केले मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे
पनी है
ंबर है रे ओ मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे
पनी है
ंबर है रे तू आजा रे हर संत कहे साधु कहे सच और साहस है जिसके मन में
ंत में जीत उसी की रहे हो मितवा सुन मितवा तुझको क्या डर है रे