घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन्-घनन् घिर-घिर आए बदरा घने-घनघोर कारे छाए बद्रा धमक-धमक गूँजे बदरा के डंके चमक-चमक देखो बिजुरिया चमके मन धड़काए बदरवा मन धड़काए बदरवा मन मन धड़काए बदरवा काले मेघा काले मेघा पानी तोह बरसाओ काले मेघा काले मेघा पानी तोह बरसाओ बिजुरी की तलवार नहीं बूँदों के बान चलाओ मेघा छाए बरखा लाए घिर-घिर आए घिरके आए कहे ये मन मचल-मचल ना यूँ चल संभल-संभल गए दिन बदल तू घर से निकल
मृत जल दुविधा के दिन बीत गए भैया मलहार सुनाओ घनन्-घनन् घिर-घिर आए बदरा घने-घनघोर कारे छाए बद्रा धमक-धमक गूँजे बदरा के डंके चमक-चमक देखो बिजुरिया चमके मन धड़काए बदरवा मन धड़काए बदरवा मन मन धड़काए बदरवा
गर बरसेगा कौन फिर तरसेगा कोयलिया गाएगी बैठी मुँडेरों पर जो पंछी गाएँगे नए दिन आएँगे
ंधेरों पर प्रेम की बरखा में भीगे-भीगे तन-मन धरती पे देखेंगे पानी का दर्पण जाइयो तुम जहाँ-जहाँ देखियो वहाँ-वहाँ यहीं एक समा की धरती यहां है पहने सात रंगों की चुनरियां घनन्-घनन् घिर-घिर आए बदरा घने-घनघोर कारे छाए बद्रा धमक-धमक गूँजे बदरा के डंके चमक-चमक देखो बिजुरिया चमके मन धड़काए बदरवा मन धड़काए बदरवा मन मन धड़काए बदरवा पेड़ों पर झूले डालो और ऊँची पेंग बढ़ाओ काले मेघा काले मेघा पानी तोह बरसाओ काले मेघा काले मेघा पानी तोह बरसाओ बिजुरी की तलवार नहीं बूँदों के बान चलाओ आयी है रुत मतवाली बिछाने हरियाली
पने संग में लाई है सावन को ये बिजुरी की पायल ये बादल का आँचल सजाने लाई है धरती की दुल्हन को डाली-डाली पहनेगी फूलों के कंगन
ब बरसेगा आँगन-आँगन
ब गली-गली हवा जो चली तोह रुत लगी भली जला दे जो तन्न-मन्न वो धूप ढली (घनन घनन घन) (घनन घनन घन) काले मेघा काले मेघा पानी तोह बरसाओ पानी तोह बरसाओ बिजुरी की तलवार नहीं बूँदों के बान चलाओ बूंदों के बान चलाओ घनन्-घनन् घिर-घिर आए बदरा घने-घनघोर कारे छाए बद्रा धमक-धमक गूँजे बदरा के डंके चमक-चमक देखो घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन घनन घनन घन